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निगेटिव आ चुके हैं तो बेफ्रिक न हों दूसरी बार फिर हो रहे हैं संक्रमित

एक्सपर्ट्स बता रहे हैं– बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को वापस संक्रमण होने का ज्यादा खतरा है। कम से कम 30 दिन तक सावधानी बरतें !

 केस स्टडी 1 

एक माह में दूसरी बार पॉजिटिव

सितंबर माह में मनपा के स्वास्थ्य समिति सभापति वीरेन्द्र कुकरेजा पॉजिटिव आए। करीब 15 दिन बाद जांच करवाने पर उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई, मगर एक माह भी पूरा नहीं हुआ और वे फिर संक्रमित हो गए।

केस स्टडी 2

19दिन में दसरी बार पॉजिटिव 

मेडिकल के एक डॉक्टर की पहली कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट 29 जुलाई को आई, फिर 5 अगस्त को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। माना जा रहा था कि उन्हें संक्रमण पहले से था और जांच करवाने में देर की। इसलिए कुछ दिनों में वे निगेटिव भी हो गए। जब उन्हें वापस कुछ लक्षण दिखे और जांच करवाई, तो 6 सितंबर को पुनः रिपोर्ट पॉजिटिव आई। फिर उन्होंने वही ट्रीटमेंट लिया और 30 सितंबर को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई।

 

केस स्टडी 3

 21 दिन में दूसरी बार संक्रमित

मेडिकल में ही मरीजों का इलाज करते हुए एक डॉक्टर 4 अगस्त को पॉजिटिव आए। 16 अगस्त की रिपोर्ट में वे निगेटिव हो गए। इसके बाद मरीजों का इलाज शुरू कर दिया। इलाज के दौरान उन्हें कुछ असहज महसूस हुआ। उन्होंने 25 सितंबर को जब जांच करवाई, तो उनकी रिपोर्ट  पुनः पॉजिटिव आ गई।

 

दूसरी बार पॉजिटिव के मामले सामने आए .मुझे ऐसे कई डॉक्टर के मामले सुनने को मिले हैं, जो एक माह

के अंदर दोबारा पॉजिटिव हुए हैं। इसमें एक तो यह हो सकता है कि कई मामले में मरीज का सैम्पल जल्दी पॉजिटिव नहीं आता है। दूसरा यह कि अगर मरीज में कोई लक्षण नहीं है, तो उसे बिना निगेटिव रिपोर्ट के ही डिस्चार्ज कर दिया है तो यह भी हो सकता है कि मरीज निगेटिव हुआ ही नहीं होगा।

तीसरा यह कि अगर निगेटिव आने के बाद मरीज फिर से पॉजिटिव आता है इसका मतलब है कि उस मरीज को जितनी इम्यूनिटी की जरूरत है, उतनी आई नहीं है। लोगो को कोरोना मुक्त होने के लिए प्रॉपर डाइट, प्रॉपर स्लीप, एक्सरसाइज करना जरूरी है। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाना है। डॉ. अविनाश गावंडे, अधीक्षक मेडिकल अस्पताल

 

60-90 दिन तक वायरस शरीर में रहता है 

स्टडीज में यह बात देखने में आ रही है कि 60 से 90 दिन तक वायरस शरीर में रहता है। इसे री-इंफेक्शन

तो नहीं कह सकते, लेकिन वायरस पूरी तरह से जाता नहीं है। कुछ ऐसे केसेस मिले हैं, जिसमें मरीज निगेटिव होने के बाद दोबारा पॉजिटिव हुए हैं। इन केसेस को री-इंफेक्शन बोला जा सकता है। संक्रमण के बाद हम लोगों ने ज्यादा मौतें 8 से 12 दिन में देखी है। ऐसे मरीज जिनको ज्यादा लक्षण नहीं हैं और वो कोरोना संक्रमण के बाद 15 दिन तक सर्वइव कर लेते हैं, उसके बाद भी अगर वो कोरोना पॉजिटिव होते हैं, तो ऐसे मरीजों को खतरा नहीं होता है। जो क्रिटिकल होते हैं उनकी बात अलग है। 

डॉ. सागर पांडे, उपाधीक्षक, मेयो

 

अभी मास्क ही वैक्सीन है

संवाददाता नागपुर

आम धारणा है कि एक बार कोरोना पॉजिटिव होने के बाद शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है, जिससे दूसरी बार पॉजिटिव नहीं होंगे। मगर यह धारणा गलत साबित हो रही है। शहर में पॉजिटिव से निगेटिव होने के एक माह के अंदर ही दूसरी बार पॉजिटिव आने के मामले सामने आ रहे हैं। शहर में सामान्य लोगों के अलावा कई ऐसे डॉक्टर हैं, जो पहले संक्रमित हुए फिर 14 दिन बाद निगेटिव आए और करीब एक माह बाद पुनः पॉजिटिव हो गए। इसलिए जरूरी है कि हर कोई हर हाल में सावधानी बरतें। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को वापस संक्रमण होने का सबसे ज्यादा खतरा है।

सावधानी बरतें, नहीं आएगी ऐसी नौबत 

पॉजिटिव से निगेटिव आए मरीजों को कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाना, सोशल डिस्टेसिंग और हाथ को बार-बार धोना उतना ही जरूरी है जितना सामान्य आदमी को। अभी तक ऐसा कोई शोध सामने नहीं आया, जिसमें कहा गया हो कि ठीक हुए मरीजों को फिर संक्रमण नहीं होगा।